Guestbook

Post a Comment

Oops!

Oops, you forgot something.

Oops!

The words you entered did not match the given text. Please try again.

Already a member? Sign In

12 Comments

Reply rishabh shukla
3:41 AM on November 11, 2014 
I want to send a poem to Abhinav Balman, Is it quite possible to publish that in their magazine. Please guide me on my email. iD [email protected]
Reply jitendra yadav
7:27 AM on June 5, 2014 
चन्दा मामा दूर के
चन्दा मामा दूर के
छिप-छिप कर खाते हैं हमसे
लड्डू मोती चूर के
लम्बी-मोटी मूँछें ऐंठे
सोने की कुर्सी पर बैठे
धूल-धूसरित लगते उनको
हम बच्चे मज़दूर के
चन्दा मामा दूर के।
बातें करते लम्बी-चौड़ी
कभी न देते फूटी कौड़ी
डाँट पिलाते रहते अक्सर
हमको बिना कसूर के
चन्दा मामा दूर के।
मोटा पेट सेठ का बाना
खा जाते हम सबका खाना
फुटपाथों पर हमें सुलाकर
तकते रहते घूर के
चन्दा मामा दूर के।
कबूतर
कबूतर
भोले-भाले बहुत कबूतर
मैंने पाले बहुत कबूतर
ढंग ढंग के बहुत कबूतर
रंग रंग के बहुत कबूतर
कुछ उजले कुछ लाल कबूतर
चलते छम छम चाल कबूतर
कुछ नीले बैंजनी कबूतर
पहने हैं पैंजनी कबूतर
करते मुझको प्यार कबूतर
करते बड़ा दुलार कबूतर
आ उंगली पर झूम कबूतर
लेते हैं मुंह चूम कबूतर
रखते रेशम बाल कबूतर
चलते रुनझुन चाल कबूतर
गुटर गुटर गूँ बोल कबूतर
देते मिश्री घोल कबूतर।
Reply Abhinavbalmann
9:27 AM on March 25, 2014 
aabhar goverdhan yadav je........aise hi sath banaye rakhiyega........haan aapka name yahan show nahi ker rha hai check kijiyega. email address se aapka name pata chala
Reply गोवर्धन यादव
3:38 AM on February 13, 2014 
अभिनव बालमन पत्रिका का प्रकाशन निःसंदेह एक बडा कदम है. इससे बच्चों कॊ एक नई राह मिलेगी,वहीं उन्हें अपनी प्रतिभा के संवर्धन को नयी दिशाएँ. इसके लिए संपादन मंडल बधाई के पात्र हैं. इससे प्रभावित होकर मैंने दो रचनाएं "शेरों के बीच एक दिन्द" और आसमान में उडती परियां " प्रे‍षित की थी. संभव है,संपादाक मंडल इसे प्रकाशित करेंगे. मेरे पोता-पोती, नाती आदि भी बढिया चित्रकरी करते हैं,उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उनके चित्र भी यहां प्रे‍षित करुंगा. पुनः बधाइयां-शुभकामनाएं
Reply Abhinavbalmann
1:47 AM on February 11, 2014 
Pramod malay je aabhar! aapka sandesh suru ka samajh nahi aa raha hai.......jara edit kijiyega......
Reply प्रमोद दीक्षित 'मलय '
11:27 AM on February 10, 2014 
पत्रिका अच्‍छी है । बधाई ।
Reply Abhinavbalmann
6:31 AM on May 15, 2013 
Thankyou Jolly uncle!
Reply Abhinavbalmann
6:31 AM on May 15, 2013 
स्वर्णा साहा जी....शुभकामनाओं के लिये अपका आभार...........
Reply JOLLY UNCLE
1:08 AM on May 15, 2013 
This is one of the best magazines for children. Very information and entertaining. I would like to congratulate and wish to all the team
members a great success.

JOLLY UNCLE - www.jollyuncle.com
Reply Swarna Saha
10:27 AM on January 16, 2013 
'अभिनव बालमन' बच्चों के स्वर्णिम भविष्य-निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी एवं रोचक पत्रिका है। मैं पत्रिका के उज्जवल भविष्य के प्रति आश्वस्त हूँ। रचनाकारों तथा संपादक मंडली को बधाई एवं शुभकामनाएँ।
-स्वर्णा साहा